बांसवाड़ा : गर्भवती महिलाओं व बच्चों के गेहूं और दाल पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का डाका
चिडिय़ावासा/बांसवाड़ा. सरकार की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती व धात्री महिलाओं सहित 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए दाल व गेहूं वितरण करवाया जा रहा है। लेकिन जिले में कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं व बच्चों के हक की दाल और गेहूं डकारने का मामला सामने आया है। क्षेत्र के कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों पर पड़ताल की गई तो पूरा खेल उजागर हुआ।
तलवाड़ा पंचायत समिति के घलकिया आंगनवाड़ी केंद्र की पड़ताल
घलकिया गांव की आशा पत्नी अनिल ने बताया कि वह 6 माह की गर्भवती है और उसकी तीन साल की लडक़ी भी है। उसने दो बार आधा किलो दाल व एक किलो गेहूं मिलना बताया। इसके अलाव उसे कुछ नहीं मिला। इधर, संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र में पता करने पर रजिस्टर में मई माह में गर्भवती महिला के नाम से 3 किलो गेहूं व एक किलो दाल, वहीं पुत्री के नाम से 2 किलो गेहूं व एक किलो दाल दर्ज थे। घलकिया निवासी मनीष पत्नी दिलीप ने बताया की उसका डेढ़ साल का लडक़ा हैं। उसे दो बार आधा किलो दाल व दो बार एक किलो गेहूं मिले है। जबकि आंगनवाड़ी केंद्र के रजिस्टर में बच्चे के नाम से दो किलो गेहूं व एक किलो दाल मई माह के भरे थे। घलकिया आंगनवाड़ी केंद्र में 14 गर्भवती महिलाएं, 9 धात्री महिलाएं, 6 माह से 7 साल के 43 बालक-बालिकाओं का पंजीकरण है।
इनका कहना है...
इस बारे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जया पंड्या ने बताया कि सब झूठ बोल रहे है। सभी लाभार्थियों को नियमानुसार दाल और गेहूं बराबर वितरित किए है।
घाटोल उपखंड के निचली मोरडी आंगनवाड़ी केंद्र की पड़ताल
निचली मोरड़ी निवासी गर्भवती महिला तारा पत्नी शांति ने बताया कि वह सात माह की गर्भवती है व उसकी तीन संतानें हैं। जिसमें से दो बच्चे 6 साल से कम उम्र के हैं। लेकिन उसे केवल 1 किलो दाल व किलो गेहूं मिले है। जबकि वह 7 किलो गेहूं और तीन किलो दाल की हकदार थी। निचली मोरड़ी गांव की ही सोनू पत्नी महेश ने बताया कि उसकी चार संतानें हैं जिसमें से तीन बच्चे 6 वर्ष से कम उम्र के हैं। आंगनवाड़ी से उसे सिर्फ एक बार ही एक किलो दाल व एक किलो गेंहू मिले हैं। तीन बच्चों के हिसाब से उसे 3 किलो दाल और 6 किलो गेहूं मिलने चाहिए थे। निचली मोरड़ी आंगनवाड़ी केंद्र में 22 गर्भवती, 15 धात्री, 6 माह से 6 वर्ष के 94 बालक-बालिकाओं का पंजीकरण हैं।
इनका कहना है...
निचली मोरड़ी आशा कार्यकर्ता मीरा डामोर ने बताया कि गेहूं की व्यवस्था नहीं होने से कम गेहूं बांटे है। कुछ बच्चे जो निजी विद्यालय में अध्ययनरत है। उनका आंगनवाड़ी में पंजीकरण नहीं होने से उन्हें दाल और गेहूं नहीं बांटे है।
source https://www.patrika.com/banswara-news/irregularities-in-distribution-of-wheat-and-pulses-by-anganwadi-worker-6192481/
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