National Blood Donation Day : बात खून की तो....थोड़ा है, बहुत की जरूरत है
बांसवाड़ा. जागरूकता के लाख प्रयासों के बावजूद वागड़ में सेहत को लेकर लोग संजीदा नहीं दिखते। जरूरत मुताबिक खान-पान के अभाव, कुपोषण और व्यसन ने बच्चों-किशोरों ही नहीं, युवाओं को भी रक्तअल्पता और कमजोरी की शिकायतें घेर रही है। ऐसे में खून की जरूरत दिनोंदिन बढऩे और इसके मुकाबले बदले में देने की फितरत नहीं बनने से गंभीर लोगों का जीवन दानदाताओं के भरोसे ही है। हालांकि शहरी युवाओं के साथ देहात से युवा रक्तदान के लिए आगे आने लगे हैं, लेकिन इनकी संख्या कम ही है। इसके चलते जिला अस्पताल का ब्लड बैंक रोज नए संघर्ष से रूबरू हो रहा है। यह तथ्य विश्व रक्तदान दिवस की पूर्व संध्या पर बैंक की ताजा स्थिति और यहां अस्पताल में उपचार के लिए आ रहे रोगियों की दशा से सामने आया है। ब्लड बैंक के अनुसार यहां 75 थैलिसिमिया रोगी पंजीकृत हैं हीं, जिन्हें नियमित अंतराल में खून उपलब्ध कराना होता है। इसके दीगर, दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों और प्रसूताओं के साथ रक्तअल्पता के चलते भर्ती होने वाले बच्चों-बड़ों के लिए व्यवस्था बड़ी चुनौती है। महीने में औसतन 300-400 यूनिट खून की यहां डिमांड रहती है, जबकि मरीजों के ...