स्कूली छात्रा के अपहरण पर दो आरोपियों को तीन साल कड़ी कैद, बलात्कार के आरोपों से किया मुक्त

बांसवाड़ा. विशिष्ट न्यायालय, पोक्सो एक्ट ने एक गंभीर आपराधिक मामले में पुलिस कार्रवाई की निंदा कर सोलह साल की स्कूली छात्रा के यौन शोषण के आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। हालांकि मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर अपहरण का आरोप साबित होने पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को तीन साल कड़ी कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले को लेकर पीडि़ता के पिता ने 2 अप्रेल,2019 को कलिंजरा थाने में डूंगरपुर के कुआं थानान्तर्गत नोलियापाड़ा हाल आनंदपुरी में अपने जीजा के घर रह रहे हितेश पुत्र मोतीलाल और आनंदपुरी के ही निवसी सुनील पुत्र कचरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें बताया कि 12वीं कक्षा में पढ़ रही उसकी 16 वर्षीया बेटी 27 मार्च,2019 को उसके काका के घर पढऩे के लिए गई और वापस नहीं आई। अगले दिन शाम करीब 7 बजे वह बदहवास हालत में लौटी। दिलासा देकर पूछा तो उसने बताया कि काका के घर जाते समय रास्ते में मोटरसाइकिल पर हितेष और सुनील मिले। दोनों उसे जबरन आनंदपुरी ले गए, जहां एक कमरे पर छोडऩे के बाद सुनील चला गया। पीछे हितेश ने उसे बंद रखकर बलात्कार किया। दूसरे दिन उसने किसी को इस बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी देते हुए बागीदौरा-नौगामा मार्ग पर छोड़ दिया। मामले में पुलिस ने नाबालिग का अपहरण कर बलात्कार करने और एसएसी-एसटीएक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। अनुसंधान के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 12 गवाह और 32 प्रदर्श पेश किए गए। मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायाधीश मोहम्मद आरिफ ने मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर पाया कि नाबालिग के बलात्कार एवं अन्य धाराओं के आरोप प्रमाणित नहीं हैं, लेकिन अपहरण का आरोप साबित करने में अभियोजन सफल रहा है। इस पर कोर्ट ने भादसं की धारा 363 के तहत दोनों आरोपियों को तीन साल कठोर कारावास और दस हजार रुपए जुर्माना सुनाया। प्रकरण में सरकार की ओर से पैरवी विशिष्ट लोक अभियोजक शौकत हुसैन ने की।

कोर्ट ने कहा, मिलीभगत कर बनाया रेप केस
43 पेज के फैसले में कोर्ट ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर टिप्पणी दी कि मामले के अनुसंधान में एससी-एसटी सेल के अधिकारी विजयकुमार सिंह का कृत्य निंदनीय है। कोर्ट ने विवेचन कर स्पष्ट कहा कि पीडि़ता पक्ष और पुलिस अधिकारियों ने मिलीभगत कर कानून का दुरुपयोग करते हुए बलात्कार और अन्य धाराओं में केस बनाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार 24 घंटे में पीडि़ता के बयान कराना जरूरी होने पर भी इस आदेश की अवहेलना की गई। केस दर्ज होने में देरी सामने आई ही, पीडि़ता के 164 के बयान कराने में वीआईपी ड्यूटी और चुनाव ड्यूटी बताकर देरी की गई, लेकिन व्यस्तता के तथ्य उपलब्ध नहीं कराए गए।



source https://www.patrika.com/banswara-news/two-accused-imprisoned-for-three-years-for-kidnapping-school-girl-6661321/

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