बांसवाड़ा : न गूंजेगा का लक्ष्मण संवाद, न दिखेगा मेले का उत्साह
बांसवाड़ा. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच राज्य सरकार की ओर से गत दिनों जारी आदेश को देखते हुए त्योहारी उत्साह फीका दिखाई पड़ रहा है। जिला मुख्यालय पर लगातार दूसरे वर्ष दशहरा मेले और रामलीला का मंचन नहीं होगा। इसे लेकर नगर परिषद में भी कोई हलचल नहीं है।
बांसवाड़ा में नवरात्रि की प्रतिपदा से 15 दिवसीय दशहरा मेले की शुरुआत होती है। इसके लिए विगत कुछ वर्षों से दशहरा मेले को ठेके पर दिया जाने लगा है, जिससे परिषद की भी आय हो रही थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के बाद गत वर्ष दशहरा मेले और रामलीला का मंचन नहीं हुआ। वर्तमान में दूसरी लहर लगभग समाप्त हो चुकी है, किंतु राज्य सरकार ने तीसरी लहर की आशंका संबंधी विशेषज्ञों की राय को तवज्जो देते हुए मेले सहित विभिन्न सामूहिक आयोजनों के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसके चलते इस बार भी दशहरा मेले की रौनक नहीं रहेगी। आयुक्त पीएल भाबोर ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दी गई गाइडलाइन की पालना करेंगे। मेले के लिए आदेश नहीं है।
गरबा आयोजन को लेकर पसोपेश
नवरात्रि में मातारानी को रिझाने विभिन्न देवी मंदिरों पर गरबों के आयोजन भी होते हैं। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर ट्रस्ट ने गरबा आयोजन नहीं करने का निर्णय किया है, लेकिन जिला मुख्यालय के विभिन्न मंदिरों में गरबों की अनुमति को लेकर पसोपेश की स्थिति है। कई मंदिरों से जुड़े मंडल आरंभिक तैयारी कर चुके हैं। वहीं प्रशासनिक स्तर पर सरकार के आदेश का हवाला दिया जा रहा है।
गरबों के आयोजन की छूट की मांग
पूर्व चिकित्सा राज्यमंत्री भवानी जोशी ने राज्य सरकार से नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों और गरबा चौक में गरबों के आयोजन की छूट की मांग की है। जोशी ने कहा कि विभिन्न राज्यों में नवरात्रि के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की गाइड लाइन जारी करने के साथ छूट दी गई है। प्रदेश में इस बारे में गाइडलाइन व निर्देश जारी नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि वागड़ गुजरात की संस्कृति से निकट से जुड़ा है। गरबा आयोजन वर्षों पुरानी परम्परा है। यह आरोग्यता के साथ शक्ति संवर्धन और आजीविका से भी जुड़ा है। उन्होंने वागड़ के देवी स्थलों और गरबा चौक पर गरबों के परंपरागत आयोजन की छूट देने की मांग की।
source https://www.patrika.com/banswara-news/dussehra-fair-and-ramlila-not-staged-7106926/
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